Tuesday, August 12, 2014

आम बजट ऐसे बनता होगा !

वीकेंड पोस्ट में मेरा कॉलम (02 अगस्त  2014)



आम बजट को संसद में पेश  करने के काफी पहले से मीडिया में खबरें आती रहती हैं--बजट में  होगा, ऐसा होगा आम बजट, बजट सुधरेगा देश की आर्थिक हालत; आदि आदि। आजकल बजट के साथ ही टीवी पर ऐसे ऐसे एक्सपर्ट पंचायत करने बैठ जाते  हैं, जो बजट को पढ़े देखे  बिना ही ज्ञान बांटने लग जाते हैं। जैसे बजट, बजट न हुआ; सलमान खान की 'किक' हो गई! बजट के आने से पहले  हुई तमाम चर्चाएं भुला दी जाती हैं। 

जैसा बजट पेश होता है उससे लगता है कि बजट ऐसे बनता होगा :

''क्या इनकम टैक्स में 5 लाख तक की इनकम टैक्स मुक्त कर दें?''

''हालत तंगी की है. नहीं कर सकते।''

''थोड़ा तो बढ़ाना होगा, बेचारी जनता आस लगाए हुए है.''

''हाँ, यह बात तो है। पचास हजार बढ़ा दो. अभी तो चुनाव पांच साल बाद होंगे।  कोई टेंशन मत लो.''

''डिफेंस वाले और धन चाहते हैं.……हथियार पुराने हैं, सेना के जवानों की तनख्वाह काम है …''

''बढ़ा दो थोड़ा सा।  यह न लगे कि  हमें देश की सुरक्षा की कोई  चिंता है. जवानों की तनख़्वाह बढ़ा दो थोड़ी बहुत. इनकम टैक्स में उन्हें कोई छूट तो है नहीं, वापस आ जाएगा सरकार के खजाने में। एक वार मेमोरियल के लिए रख दो सौ करोड़।''

''महिलाओं लिए कुछ  करना पड़ेगा। उनको बहुत आस है, पर धन नहीं है। नए टैक्स थोप नहीं सकते।''  

''सौ करोड़ रख दो एक तरफ!''

''युवाओं के लिए भी कुछ करना पड़ेगा। ''

''दे दो पचासेक करोड़। उनके कारण ही तो जीते हैं चुनाव में. धन की कमी है।''

''अजा- अजजा  भी कुछ करना पड़ेगा.''

''पुराने खर्चे मत बढ़ाना,  नए  एक दो  कोष बना दो. ऐसा लगे तो कि हमें उनकी चिंता है। '' 

''सीनियर सिटीजन के लिए भी कुछ तो होना चाहिए।''

''अब इनमें से कितने जीवित रहेंगे अगले चुनाव तक? .... चलो दे दो बुढ्ढों को भी कुछ।''

''…और कुछ बताइये ?''

''अब ऐसा करो कि लगे हमारी सरकार कुछ चमत्कारी काम करनेवाली है। हाई  फाई सिटी,  स्टेडियम बनाने ,  ई गवर्नेंस, नदी के शुद्धिकरण, किसानों के लिए खेती की मिट्टी की जांच वगैरह वगैरह के  लिए भी कुछ कर डालो, जिससे लगे कि हमारा बजट अच्छा है।  आखिर बेचारे टीवी एक्सपर्ट को यह कहने को तो मिले कि यह बजट चमत्कारी है।''

.... और बजट इसी तरह बन जाता है।  संसद के  सदन में पेश हो जाता है। हम चर्चा करते हैं।  विशेषज्ञ बेचारे बाद में चिंतन करते रहते हैं कि बजट ऐसा रहा, वैसा रहा। 
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