Saturday, June 11, 2011

जूझने के जज्बे ने दिलाई कामयाबी


रविवासरीय हिन्दुस्तान के एडिट पेज पर मेरा कॉलम


ओप्रा विनफ्रे जानी मानी अभिनेत्री, फ़िल्म निर्माता और दानदाता हैं. ओप्रा विनफ्रे दुनिया की सबसे प्रभावशाली अश्वेत महिलाओं में गिनी जाती हैं. वे पहली अश्वेत महिला अरबपति हैं.

जूझने के जज्बे ने दिलाई कामयाबी

विश्वविख्यात ओप्रा विनफ्रे शो का फेयरवेल सीजन ख़त्म हो गया लेकिन कुछ देशों में रिपीट टेलीकास्ट चल रहा है. पच्चीस साल की शानदार पारी में 4561 एपिसोड का यह कार्यक्रम अमेरिकी टीवी के इतिहास का सबसे ऊँची रेटिंगवाला शो रहा है. 120 से ज्यादा देशों में दिखाए गए इस शो में दुनिया के सबसे नामी गिरामी लोगों ने शिरकत की. हर तरह के मसालों से भरपूर इस शो में सकारात्मक नजरिया, सेल्फ इम्प्रूवमेंट, दान, सहयोग, अध्यात्म आदि रहा है. वे जानी मानी अभिनेत्री, फ़िल्म निर्माता और दानदाता हैं. ओप्रा विनफ्रे दुनिया की सबसे प्रभावशाली अश्वेत महिलाओं में गिनी जाती हैं. वे पहली अश्वेत महिला अरबपति हैं. मोंतेसिटो, केलिफोर्निया में 42 एकड़ के एस्टेट में बने भव्य विला में रहती हैं. दुनिया के अनेक देशों में उनके भव्य महलनुमा मकान हैं. वे बेहद गरीबी में पलीं और बड़ी हुईं. अपनी प्रतिभा से उन्होंने अपनी जगह बनाई. ओप्रा विनफ्रे अगर भारत में होतीं तो निश्चित ही उन्हें कोई अवतार, देवी या महाशक्ति के रूप में याद किया जाता. टीवी होस्ट से ग्लोबल कल्चरल आयकोन बननेवाली ओप्रा विनफ्रे की सफलता के कुछ सूत्र :

हालात से मत डरो
ओप्रा विनफ्रे की माँ घरेलू नौकरानी थीं और जब वे केवल 13 साल की थीं, तब उनके साथ बलात्कार किया गया था इसलिए उनके जन्म के बाद परिवार और पिता का साया उन्हें नसीब नहीं हुआ. माँ ने उनकी नानी के पास उन्हें छोड़ दिया जो खुद बेहद मुफलिसी में थीं. कुछ साल फतेहाले में गुजरे और उन्हें गोद दे दिया गया ऐसे परिवार में जो बेहद क्रूर था. उनके साथ मारपीट और अभद्रता तो आम बात थी. जब वे तेरह साल की थीं, तब उनके साथ बलात्कार किया गया, चौदह की उम्र में वे बिनब्याही माँ बनीं, लेकिन बच्चा एक सप्ताह भी जीवित नहीं रह सका. वे नशे की शिकार हो गयीं और फिर इसका इलाज कराने उन्हें नशा मुक्ति केंद्र भेजा गया. ओप्रा विनफ्रे ने विकटतम दिनों का मुकाबला डटकर किया.

बुद्धि हमेशा उपयोग में लाओ
ओप्रा विनफ्रे का फार्मूला यह रहा कि विपरीत से विपरीत हालात में भी बुद्धि पर भरोसा करना मत छोड़ो. दुर्दिनों में दो साल उन्होंने अपनी पढ़ाई भी छोड़ी लेकिन फिर पढाई शुरू की. ब्रोडकास्ट कम्युनिकेशन की पढ़ाई करने के बाद उन्हें लोकल टीवी में पार्ट टाइम रिपोर्टर का काम मिला. इस बीच वे एक स्थानीय ब्यूटी कान्टेस्ट भी जीत चुकी थीं. तीन साल बाद उन्होंने अपना जॉब बदल दिया और एक बड़े प्लेटफार्म को आधार बनाया. उन्होंने अपने हर शो में अपनी बुद्धि का लोहा मनवाया. प्रस्तुति को हमेशा जीवंत बनाये रखा.

कोई पद छोटा नहीं होता
कोई भी काम छोटा नहीं होता. यह बात ओप्रा विनफ्रे ने साबित कर दी. उनका स्टाइल बड़े पद पर बैठे लोगों को रास नहीं आया. नयी कंपनी में साल भर भी नहीं हुआ था कि उन्हें नौकरी से हटाने के बजाय पदावनत करके टीवी ब्रोडकास्टर से टीवी शो प्रजेंटर बना दिया गया और वह भी दोपहर में महिलाओं के शो का. ओप्रा विनफ्रे ने महसूस किया कि यही काम उनके लिए सही काम है जब वे महिला दर्शकों को अपनी हाजिरजवाबी, अपनेपन, साफगोई और दिलचस्प शैली से प्रभावित कर सकती हैं. वे कहती हैं कि विफलता ईश्वर का वह वरदान है जो आपको इशारा करता है कि आप शायद गलत राह पर हैं.

रंग और शक्ल पर मत जाओ
ओप्रा विनफ्रे ने महिलाओं के उस कार्यक्रम को सात साल तक प्रस्तुत किया. इस बीच प्रबंधन में बैठे लोगों को उनकी अनेक बातों से शिकायतें हुईं. कहा गया कि आपके बाल ठीक से जमे नहीं होते, उनकी नाक ज्यादा ही लम्बी है और दो आँखों के बीच दूरी ज्यादा है. उनका वजन ज्यादा है आदि आदि. प्रबंधन ने उन्हें न्यूयोर्क भेजा ताकि उन्हें ठीक से बाल जमाना, सही ढंग से मेकअप करना आदि सिखाया जा सके. यह भी सलाह दी गयी कि वे सिर को मुंडा लें और विग पहनना शुरू कर दें.इस सब का नतीजा यह हुआ कि उन्होंने अपने आप पर ध्यान देना शुरू किया और खुद को ज्यादा प्रभावी टीवी शो के प्रस्तुतकर्ता के रूप में आगे लाने की सकारात्मक कोशिश की.

बेख़ौफ़ होकर सच बोलो
ओप्रा विनफ्रे शो की लोकप्रियता का एक कारण उनकी बेबाकी भी रही है. वे अपने प्रोग्राम के वीआइपी मेहमानों की लल्लो - चप्पो नहीं करतीं. कुछ माह पहले उनके शो में अतिथि के रूप में मशहूर फैशन डिजाइनर टोमी हिलफिगर आये थे. उनका परिचय देने के बाद ओप्रा ने उनसे पूछा -- क्या ये बात सच है कि आपने हाल ही में एक वर्णवादी और रंगभेदी बयान में कहा था कि मेरे बनाये कपड़े अफ्रीकी, एशियाई, अमेरिकी सभी खरीदते हैं लेकिन मैं चाहता हूँ कि मेरे कपड़े अश्वेत और एशियाई नहीं खरीदें. क्या ये बात सही है? टोमी हिलफिगर ने जवाब दिया --हाँ. ओप्रा ने उन्हें कहा तत्काल इस शो से बाहर जाइए. मैं सभी लोगों से गुजारिश करती हूँ कि टोमी हिलफिगर के डिजाइन किये वस्त्र कोई न खरीदे. इनकी आर्थिक हालत ऐसी बना दो कि ये कभी भी कभी भी बहुसंख्यक आबादी के बारे में ऐसा सोचने की जुर्रत न कर सके.

सभी को साथ लो
ओप्रा विनफ्रे फाउंडेशन बनकर करोड़ों डॉलर दान देनेवालीं ओप्रा का मानना है कि आपको जिन्दगी के हर मोड़ पर कुछ न कुछ जिम्मेदारी दी गयी है, उसे पूरा करो. उनकी मदद करो जो हकदार लेकिन मोहताज हैं. अपने काम को ताजी से आगे बढ़ाने के लिए अपने अधीनस्थों को अधिकार सौंपो. रोजमर्रा के जीवन में जो भी आपके साथ हों उनसे दिल से जुड़ो. आपके जीवन में जिसने भी योगदान दिया है, उसका आभार मानना न भूलो. आपको काम के बारे में जो भी प्रतिक्रिया मिले, उसे अवश्य सुनो और अगर सुधर की गुंजाइश हो तो उसे सुधारने में देरी मत करो.

जीवन का सबसे बड़ा रहस्य
ओप्रा का मानना है कि जीवन का सबसे बड़ा रहस्य यह है कि रहस्य नाम की कोई चीज़ है ही नहीं. इसलिए बेखौफ होकर जो भी अच्छा लगे वही करो. आपका जो भी लक्ष्य हो, वह तभी मिल सकता है जब आप पूरा जोर लगाकर उसकी दिशा में काम करें. काम वही चुनें जो आपको पसंद हो. किसी भी सीमा में खुद को ना बांटे. और जो भी करें दिल लगाकर करें, पूरी शक्ति उस लक्ष्य को पाने में झौंक दें. अगर लक्ष्य को पाने में कोई भी शक हो रहा हो तो किसी और से नहीं, खुद अपने से ही पूछो -- जवाब भी वहीँ से मिलेगा. हर सुबह के पांच मिनिट केवल इस बात के लिए रखो कि आप अपने आप से बात कर सको. अगर आपके पास अपने लिए पांच मिनिट भी नहीं हैं तो आप को कामयाबी की आशा नहीं करनी चाहिए.

प्रकाश हिन्दुस्तानी

हिन्दुस्तान june 12, 2011
Post a Comment