Saturday, March 29, 2014

इलेक्शन टूरिज्म का मौसम


वीकेंड पोस्ट के  29 मार्च 2014   के अंक में  मेरा कॉलम
                    ....................................................
अगले तीन-चार हफ्ते इलेक्शन टूरिज्म के नाम होंगे। 
चुनाव के साथ ही नेता, क्रिकेटर और फिल्मी हीरो हीरोइनों को देखने सुनाने का अद्भुत संयोग! अचानक यूपीवालों की बन आई है। काशी  यानी वाराणसी आकर्षण का फिर केंद्र बन गया है। ताजमहल के लिए आगरा और कबाब के लिए लखनऊ फेमस था ही, अब काशी-मथुरा का नाम लिया जा रहा है।
.....................................................

इलेक्शन टूरिज्म का सीजन फिर आ गया है। अगले तीन-चार हफ्ते इलेक्शन टूरिज्म के नाम होंगे। चुनाव के साथ ही नेता, क्रिकेटर और फिल्मी हीरो हीरोइनों को देखने सुनाने का अद्भुत संयोग! अचानक यूपीवालों की बन आई है। काशी  यानी वाराणसी आकर्षण का फिर केंद्र बन गया है। ताजमहल के लिए आगरा और कबाब के लिए लखनऊ फेमस था ही, अब काशी का नाम नरेंन्द्र मोदी, विजय प्रकाश जायसवाल (बसपा) और अरविंद केजरीवाल के कारण फिर चर्चा में है। मथुरा का नाम कृष्ण मंदिरों के साथ-साथ दिलावर खान यानी धरम पाजी की बेगम आयशा बी यानी एशा देओल की सगी और सनी देओल पाजी की सौतेली मां हेमा मालिनी के लिए लिया जा रहा है।

गाजियाबाद को एनसीआर का महत्वपूर्ण केन्द्र माना जाता है, आज वह राज बब्बर, जनरल वीके सिंह और शाजिया के लिए जाना जा रहा है। अमेठी जाने वालों की भी कतार है, कुमार विश्वास की कविताएं कैसी हैं, जानना दिलचस्प होगा। कभी यहां से संजय गांधी सांसद हुआ करते थे, उनकी मौत के बाद यहां से राजीव गांधी खड़े हुए तो तौलियों की मॉडलिंग कर चुकी गांधी परिवार की बहू मेनका यहां से कड़ी हो गईं, पर जेठजी (राजीव गांधी) से उन्होंने जोरदार मात खाई। ऐसी मात कि अब संजय के बेटे वरुण ने अपनी पार्टी के नेताओं से साफ कह दिया कि मैं भैया (राहुल) और ताईजी (सोनिया गांधी के क्षेत्र रायबरेली) जाऊंगा ही नहीं। रायबरेली  सोनियाजी का इलाका है और समाजवादी पार्टी ने कहा है कि वह यहां से उम्मीदवार ही खड़ा नहीं करेगी, क्योंकि डिम्पल यादव के खिलाफ कांग्रेस ने उम्मीदवार खड़ा नहीं किया था। हिसाब बराबर! लखनऊ में कबाब के साथ राजनाथसिंह और हेमवतीनंदन की बेटी रीता बहुगुणा के भाषणों का लुत्फ! 

यूपी के ही फूलपुर में भी इलेक्शन टूरिज्म की अच्छी संभावनाएं हैं। यहां से तीन-तीन बार नेहरूजी जीत चुके हैं। इस बार क्रिकेटर मोहम्मद कैफ इलेक्शन के मैदान में वोटों के रन बनाएंगे। अगर क्रिकेट और नेतागीरी का घालमेल ही देखना हो तो राजस्थान में सवाई माधोपुर जाना पड़ेगा, जहां भूतपूर्व मिस इंडिया और भूतपूर्व  हीरोइन संगीता बिजलानी के भूतपूर्व पति और क्रिकेट सट्टे  के मामले में जानकार मोहम्मद अजहरुद्दीन मैदान में हैं। राजस्थान के जयपुर ग्रामीण में भूतपूर्व ओलिम्पियन निशानेबाज राज्यवर्धन सिंह निशानेबाजी कर रहे हैं। 
केंद्रीय शासन वाले चंडीगढ़ भी कौन जाना नहीं चाहेगा? आरोपों के बाद हटाने वाले रेल मंत्री पवन बंसल के साथ ही साथ यहां अनुपम खेर की बीवी किरण खेर मैदान में हैं और उनके सामने समलैंगिकों की पक्षधर मिस इंडिया रह चुकी गुल पनाग यहां अपने जलवे दिखने वाली हैं। चंडीगढ़ से अमृतसर जाकर आप स्वर्ण मंदिर साहिब के दर्शन कर सकते हैं और पटियाला पैग वाले पटियाला के भूतपूर्व राजा अमरिंदर सिंह से मिल सकते हैं।  अगर खुश हों तो हो सकता है आपको एक-दो ऑफर कर दें। 

बिहार के पटना पहुंचें तो पटना साहिब गुरुद्वारे मत्था टेकने के साथ सोनाक्षी सिन्हा के बापू शत्रुघ्न सिन्हा को भी देख लेंगे। संतरों के शहर में जाकर नागपुर आप नितिन गडकरी से मिल सकते हैं, संतरे खा सकते हैं, संघ का मुख्यालय बाहर से देख सकते हैं (अंदर कौन जाने देगा?)। साउथ घूमने का मन  हो तो वहां फिल्मी सितारों और उनके बीवी-बच्चों का माहौल देख सकते हैं और देश के (ऑफिशियली) सबसे मालदार उम्मीदवार नंदन नीलेकणि से मिलने बेंगलुरु जा सकते हैं, जिनके पास आधिकारिक रूप से 7700 करोड़ की सम्पदा है। और दिल्ली? दिल्ली क्या जाना, जिनको हमेशा से ही टीवी पर 'नमस्काआआआरÓ करते सुनते आए ऐसे (आशुतोषजी) नेताओं से क्या मिलना ? वो जीत भी गए तो भी दिल्ली ही जाएंगे, हारे तो भी वहीं मिलेंगे। तो बना लो अपना टूर प्रोग्राम! मुझे भी साथ ले चलना।

--प्रकाश हिन्दुस्तानी 

वीकेंड पोस्ट ,  29 मार्च 2014 

Post a Comment