Sunday, August 07, 2011

गरिमामय हास्य ने दिलाई पहचान

रविवासरीय हिन्दुस्तान के एडिट पेज पर मेरा कॉलम (06/08/2011)



गरिमामय हास्य ने दिलाई पहचान

एकपात्रीय मंचीय कॉमेडी की दुनिया में भारत का नाम रोशन करनेवाले कॉमेडियन पापा सी जे ने वैश्विक मंच पर कॉमेडी को स्थापित किया है. उनके आठ सौ से ज्यादा मंचीय शो को अमेरिका, अफ्रीका, एशिया और यूरोप में लाखों लोग देख चुके हैं. बीबीसी, एनबीसी,एम टीवी जैसे चैनलों पर वे अपनी कॉमेडी के शो से लोगों का ध्यान खींच चुके हैं. मुकेश अम्बानी से लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया तक उनके प्रशंसकों में से हैं. वे अपने कॉमेडी के शो नोकिया, ऑडी, ब्रिटिश कौंसिल जैसे संस्थानों में भी देते रहते हैं. कहा जाता है कि उन्होंने स्टैंड अप कॉमेडी को एक नया मुकाम दिया है और खुद एक कॉर्पोरेट हस्ती बन गए हैं. पापा सी जे नाम से प्रसिद्ध सफलता के शीर्ष पर पहुंचे इस ग्लोबल कॉमेडियन की कामयाबी के कुछ सूत्र :
असली नाम छुपाने का राज़
पापा सी जे उनका असली नाम नहीं है, लेकिन वे अपना असली नाम किसी को भी ना तो बताना चाहते हैं और ना ही बता सकते हैं. असली नाम की बात पर वे यही बात वे लोगों से कहते हैं कि खतरनाक हत्यारों द्वारा की गई एक हत्या के मामले में उन्होंने गवाही दी थी और वे हत्यारे उनके पीछे पड़ गए. ऐसे में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस ने उन्हें विटनेस प्रोटेक्शन प्रोग्राम के तहत अपनी पहचान छुपाकर रखने का आदेश और अनुमति प्रदान की. और इसी कारण वे अपनी असली पहचान छुपाकर जी रहे हैं. वे एक ऐसे नागरिक हैं जो अपनी जान को जोखिम में डालकर भी क़ानून की मदद करने से नहीं चूकता हो.
नया करने का जुनून
ज़िंदगी में कुछ नया करने के जुनून ने पापा सी जे को भीड़ से अलग जाकर नया कुछ करने को मज़बूर किया. १९७७ में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को जन्मे पापा ने शुरुआती २० साल भारत में बिताये. सनावर और कोलकाता में पढ़ाई के बाद वे ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में एमबीए की डिग्री लेने पहुंचे. उन्होंने पढ़ाई के साथ साथ बहुत से खेत्रों में काम किया और नाम (शोहरत) तथा नामा (दौलत) अर्जित किया. पापा इस बात से असहमत रहते कि जो कुछ चल रहा है, ठीक है. कुछ नया करने का जुनून उन पर सदा सवार रहता है और इसीलिये वे कुछ खास कर सके.
टीवी शो ने बदली दुनिया
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान ही उन्हें टीवी चैनल पर कॉमेडी के शो में प्रतियोगी के रूप में भाग लेने का मौका मिला. इस शो में ऑडिशन के लिए हजारों लोग आये थे. पापा सी जे ने भी इसमें भाग लिया और उनकी कॉमेडी को लोगों ने पसंद किया. वे इस शो में टॉप टेन प्रतियोगियों तक पहुंचे.लोगों की पसंद को देखते हुए उन्होंने कॉमेडी जारी रखी. लोगों ने उन्हें कार्यक्रमों में बुलाना शुरू कर दिया और धीरे धीरे उनके शो लोकप्रिय होते चले गए.
अश्लीलता से दूरी
पापा सी जे ने अपने शो को अश्लीलता, फूहड़पन और दो अर्थोंवाले संवादों से मुक्त रखा है. वे जानते हैं यह लोगों को हंसाने का सरल रास्ता है लेकिन यह एक घटिया काम है. उनका मानना है कि यही किसी कॉमेडियन की असली परीक्षा भी है कि वह किस तरीके से अपना काम करता है. पापा सी जे हर बार नए नए तरीके से लोगों को हंसाने की कोशिश करते हैं और इसमें कामयाब भी रहते हैं क्योंकि वे विषय का चयन बहुत सावधानी से करते हैं और तात्कालिक घटनाओं का भी उसमें समावेश करने से नहीं चूकते जो लोगों के जीवन को प्रभावित करती हैं.
मौलिक लेखन
पापा सी जे अपने हर शो में नयापन रखते हैं और हर बार अपनी स्क्रिप्ट खुद लिखते हैं. वे चाहें तो यह काम दूसरे लेखकों से भी लिखवा सकते हैं लेकिन उनका मानना है कि अगर शो की स्क्रिप्ट मेरी अपनी है तो मैं उस शो में अपने हावभाव बेहतर तरीके से व्यक्त कर सकता हूँ. दुनिया के कई देशों में घूम चुके होने से उन्हें लोगों के अलग अलग स्वाभाव का अंदाजा है और इसीलिये उनकी विषयवस्तु हर जगह अलग होती है.
बहुधन्धी व्यक्तित्व
पापा सी जे बहुधन्धी व्यक्तित्व के धनी हैं. वे जाने-पहचाने जाते हैं अपनी स्टैंडअप कॉमेडी की वजह से, जो उन्होंने २७ साल की उम्र में २००४ में शुरू की थी, लेकिन उनके कामों में लन्दन में मैनेजमेंट कंसल्टेंसी देना और प्रोफेशनल वर्कशॉप आयोजित करना भी शामिल रहा है. अब वे अपने काम को नए मुकाम तक पहुँचाना चाहते हैं जिसके तहत उनके शो के डीवीडी बनाकर बेचना और फिल्मों में काम करना शामिल है. वे भारत के सभी प्रमुख शहरों में अपने शो करने की योजना भी बना रहे हैं.
चैरिटी कार्य
पापा सी जे चैरिटी के काम को भी महत्व देते हैं. 'वन चाइल्ड' नाम की एक संस्था का खर्च वे अपने कार्यक्रम की पूरी कमाई देकर उठाते हैं. इस कार्यक्रम के टिकिट पंद्रह पौंड में बेचे जाते हैं और एक धेला भी वे नहीं लेते. इस संस्था द्वारा संसाधनहीन बच्चों की पूरी देखभाल की जाती है, उनकी पढ़ाई से लेकर निवास, भोजन और खेलकूद तक का खर्च यही संस्था उठाती है. इसके अलावा बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य, भारत के ग्रामीण इलाकों में लोगों का जीवन स्तर ऊंचा उठाने के काम में भी वे मदद करते हैं. संस्था के कामों की यजन बनाने से लेकर उन योजनाओं पर अमल करने तक के काम में उनकी भूमिका रहती है.
सौ प्रतिशत भारतीय
पापा सी जे भले ही अंतर्राष्ट्रीय नाम हो गया हो, लेकिन वे अपने आप को सौ प्रतिशत भारतीय ही मानते हैं. वे कहते हैं कि मैं एक पतंग की तरह हो गया हू, जो उड़ती तो ऊपर आसमान में है, लेकिन एक डोर से जुडी होती है. भारतीय भोजन, भारतीय परिधान, हिन्दी और पंजाबी फ़िल्में और उनका संगीत उन्हें भाता है. भारत में वे नए कलाकारों को स्टैंड अप कॉमेडी के लिए प्रशिक्षित भी कराते हैं और उन्हें विविधतापूर्ण कामों के लिए प्रेरित भी करते हैं.
प्रकाश हिन्दुस्तानी

हिन्दुस्तान 6 auguest 2011
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