Tuesday, October 21, 2014

ज्ञानचंदों का बिज़ी सीजन

वीकेंड पोस्ट में मेरा कॉलम (28 मई 2014)




कुछ दिन से ज्ञानचंद लोग बहुत बिज़ी हैं. चुनाव के आसपास उनका सीजन रहता है। वे ही सवाल खड़ा करते हैं और वे ही जवाब भी तैयार रखते हैं. जो पहले कहते थे कि एनडीए को बहुमत नहीं मिलेगा, अब कह रहे हैं--देखा ले आये न मोदी अपने  बूते पर भाजपा का बहुमत.
आजकल वे मोदी जी की चिंताओं को लेकर परेशान हैं. आज़ादी के बाद पैदा हुए सांसद ही मंत्री बनेंगे तो हमारी ताई का क्या होगा?  क्या वे स्पीकर के लिए मान  जायेंगी? पर वहां तो लालकृष्ण आडवाणी जी का नाम चल रहा है! अरे! सुषमा  स्वराज का नाम भी स्पीकर के वास्ते चल रहा है? ऐसा करना चाहिए कि पहले आडवाणी जी को स्पीकर बना देना चाहिए और बाद में प्रणब दा की जगह राष्ट्रपति !
अब ये ज्ञानचंद मोदी जी के टेंशन घर तक ले जा रहे हैं.  मोदी को मंत्रीमंडल में किस किस को लेना चाहिए और किस को नहीं. कुछ ज्ञानचंदों ने तो मंत्री बनाकर उनके विभागों का बंटवारा भी कर डाला.  जेटली वित्त मंत्रालय के लायक हैं या नहीं, राजनाथ को होम डिपार्टमेंट ठीक ही है। गडकरी को सडकों का अच्छा अनुभव है, भूतल परिवहन ठीक रहेगा. अमित शाह को यूपी में ही बिठाए रखना चाहिए, बन्दे में दम है.नहीं नहीं, शाह को तो होम मिनिस्टर बना दो
एक और ज्ञानचंद मंडली मोदी के विदेश मंत्रालय की कमान सभाले हुए है। पाकिस्तान के साथ यूं निपटना चाहिए। चीन को सुधारने का रास्ता ये है. ओबामा अबअफी मांगने आया समझो। जापान से तो मोदी जी के पुराने अच्छे सम्बन्ध हैं , पता है कि नहीं?
एक और ज्ञानचंद गंगा की सफाई पर चिंतित है। मोदी जी ने ज्यादा बोल दिया यार. गंगा साबरमती कैसे बन सकती है? गंगा की सफाई करने जायेंगे तो कानपुर के चमड़ा फैक्टरी वाले नाराज हो जायेंगे। वे कहेंगे कि मोदी ने  अल्पसंख्यकों को सताना शुरू कर दिया है। मोदी में  पोलिटिकल विल तो है पर वोट बैंक भी बड़ा मसाला है।
अब 26 को मोदी जी की शपथ हो जाएगी। मंत्री चुन लिए जाएंगे. ज्ञानचंद फिर नया टेंशन लेकर बिज़ी हो जायेंगे. अगली बार, फिर अगली अगली बार मोदी सरकार। बार बार मोदी सरकार।
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