Saturday, July 16, 2011

कामयाबी के लिए मौलिकता ज़रूरी

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अब सोनू निगम और ब्रिटनी स्पिअर्स की जोड़ी 'आई वान्ना गो' के रिमिक्स में देखने को मिलेगी. पार्श्व गायक, अभिनेता, रेडियो और टीवी कार्यक्रम प्रस्तोता, स्टेज आर्टिस्ट और संगीतकार सोनू निगम इसके पहले माइकल जेक्सन के भाई के साथ आइफा के आयोजन में प्रस्तुति दे चुके हैं. 38 साल के सोनू 35 साल से गाने गा रहे हैं. तीन साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता श्री अगम निगम के साथ एक मंच पर फ़िल्म 'हम किसी से कम नहीं' का मो. रफ़ी का गाना 'क्या हुआ तेरा वादा...' गया था और उसके बाद गायन से उनका रिश्ता अटूट हो गया. 35 साल के गायन में उन्होंने हिंदी के साथ ही अंग्रेज़ी,नेपाली, मराठी, पंजाबी, तमिल, तेलुगु, मलयालम, बांग्ला, कन्नड़, भोजपुरी और छत्तीसगढ़ी फिल्मों में भी गाने गाये हैं और दुनिया के लगभग सभी प्रमुख शहरों में स्टेज शो किये हैं. ब्याह-शादी के आयोजनों और होटलों में गायन से शुरुआत करनेवाले सोनू निगम को कामयाबी आसानी से नहीं मिली. सोनू निगम की सफलता के कुछ सूत्र :

कोई मजबूरी स्थायी नहीं
सोनू निगम के घर के हालात बुरे नहीं थे लेकिन आगे बढ़ने की जिद ने सोनू निगम से कई तरह के काम करवाए. सोनू निगम के पिता मंच के कलाकार थे और तीन साल की उम्र में ही उन्होंने पिता के साथ मंच पर आमद दर्ज करा ली थी. उनका लक्ष्य गायन के क्षेत्र में नाम कमाना था वे उनके स्कूल जाने और खेलने के दिन थे लेकिन उन्हें होटलों और शादी ब्याह में मंच की शोभा बढ़ाना पड़ रही थी. उनके पिता और वे जानते थे कि मज़बूरी का यह दौर ख़त्म होगा और हुआ भी. वे हर दिन कुछ न कुछ नया करने के लिए जुटे रहे और असफलताओं को पार करते हुए खुद का मुकाम बनने में कामयाब रहे. उनका संकल्प यही था कि कोई भी काम अगर मज़बूरी में किया जा रहा है या करना पड़ रहा है तो वह दौर कभी भी स्थायी नहीं हो सकता.

हर भूमिका में सर्वश्रेष्ठ
सोनू निगम ने हर तरह की भूमिकाओं को अपने सर्वश्रेष्ठ के साथ जीया है. बाल गायक के रूप में जब उन्होंने गायन स्पर्धाओं में जाना शुरू किया तब लगभग हर बार उन्हें ही पुरस्कार मिलता. स्पर्धा आयोजकों ने उन्हें बाल गायक कलाकार की सूची से ही बाहर कर दिया और उन्हें वयस्क गायकों की सूची में दाल दिया. वहां भी वे जीतते गए तो उन पर रोक लगाने के लिए उन्हें ही स्पर्धाओं का जज बनाया जाने लगा. जब वे अपने पिता के साथ मुंबई शिफ्ट हुए और फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में काम मिला तो उन्होंने पांच फिल्मों में भूमिकाएं की. जब उन्होंने टी सीरीज के लिए कवर वर्जन गाये तब वे भी बेहतरीन थे और पार्श्व गायन में 'संदेसे आते हैं', 'साथिया...', कल हो न हो'. 'पंछी नदिया..', 'सूरज हुआ मद्धम..'के लिए सर्वश्रेष्ठ पुरुष गायक का फ़िल्मफेयर अवार्ड मिल चुका है. राष्ट्रीय फ़िल्म अवार्ड, जी सिने, आईफा, स्टार स्क्रीन आदि अनेक देशी-विदेशी अवार्ड उनकी झोली में हैं. उन्होंने जो भी किया अपना सर्वश्रेष्ठ करने की कोशिश के साथ.

नकलची ना बनें

सोनू निगम के पिता मो. रफ़ी के भक्त होने की हद तक प्रशंसक थे. वे रफ़ी साहब के नग्मे खूब गाते थे. सोनू ने भी गायन की शुरुआत रफ़ी के नग्मे से ही की थी. हर जगह सोनू रफ़ी के नग्मे गाते. लोग उन्हें दूसरा रफ़ी कहने लगे. 31 जुलाई 1980 को रफ़ी साहब का इंतकाल हो गया और उस दौर में कवर वर्जन खूब चल पड़े थे, जो असली अलबम से काफी सस्ते और सर्वसुलभ थे. टी सीरीज के लिए सोनू ने दर्जनों कवर वर्जन प्रति अलबम पाँच पाँच हजार रुपये में रिकार्ड करवाए. आज पुरानी राहों से...,टूटे हुए ख्वाबों ने..., ये आंसू मेरे दिल की जुबान हैं..., सौ बार जनम लेंगे..., तकदीर का फ़साना...,भरी दुनिया में आखिर दिल...., मिली खाक में मोहब्बत..., रहा गर्दिशों में हरदम मेरे इश्क का सितारा...,अकेले हैं चले आओ..., आपके पहलू में आकर रो दिए...., जैसे दर्जनों गाने सोनू ने गाये जो हू ब हू रफ़ी का स्वर लगते थे. ऐसा लगता था कि अब सोनू का करीयर ख़त्म क्योंकि रफ़ी के डुप्लीकेट की मार्केट में कितनी दिन मांग रहती. सोनू इस स्थिति को समझ चुके थे और अपनी आवाज़ में पार्श्व गायन करने लगे थे.

अलग पहचान की ज़रुरत

सोनू निगम ने संगीत निर्देशिका उषा खन्ना के आशीर्वाद से अमर उत्पल के संगीत निर्देशन में फ़िल्म 'आजा मेरी जान' के लिए पहला गाना रिकार्ड कराया था. लेकिन फ़िल्म में यह गाना नहीं लिया गया. इसे फिर से बाला सुब्रमण्यम से गवाया गया. इस फ़िल्म में उनके पाँच गाने रिकार्ड कराये गए लेकिन एक गाना ही लिया गया. 1995 में टी सीरीज के गुलशन कुमार की फ़िल्म बेवफा सनम के एक गाने 'अच्छा सिला दिया तूने मेरे प्यार का' ने उन्हें एक पहचान दिलवाई. 1 मई 1995 से ही टीवी पर 'सा रे गा मा' शो शुरू हुआ और वे इसके होस्ट थे. यह कार्यक्रम बेहद लोकप्रिय हुआ और अब तक इसके २०० से ज्यादा एपिसोड प्रसारित हो चुके हैं. 1997 में बॉर्डर फ़िल्म में संदेसे आते हैं गीत ने उन्हें डुप्लीकेट रफ़ी की छवि से अलग पहचान को मज़बूत किया.

सही तालीम, सही लक्ष्य अनिवार्य
सोनू केवल बारहवीं कक्षा तक ही स्कूल गए. स्नातक की डिग्री उन्होंने दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से पाई, लेकिन शास्त्रीय संगीत की तालीम भी ली है जिस कारण वे अपने गायन को परिपूर्णता देने में काफी हद तक सफल रहे हैं. सही तालीम के कारण ही वे अपने लिए सही भूमिका चुन सके. बाल कलाकार के रूप में बेताब, कामचोर, तकदीर, हम से है ज़माना, प्यारा दुश्मन, उस्तादी उस्ताद से जैसी फिल्मों में काम करने के बाद वे जानी दुश्मन, काश आप हमारे होते, लव इन नेपाल और मराठी फ़िल्म नवरा माझा नवसाचा में भी काम कर चुके हैं और शांतनु-निखिल के फैशन शो में रैम्प पर भी कदमताल कर चुके हैं, लेकिन वे जानते हैं कि उनका भविष्य एक्टिंग में नहीं, गायन में है. उन्होंने अपने गायन को पार्श्व गायन तक ही सीमित रखने के बजाय लाइव शो, टीवी कार्यक्रम, प्राइवेट अलबम और देश विदेश के कलाकारों के साथ मिलकर काम कर रहे है.

सेहत और सेवा
xसोनू निगम अपने शरीर और लुक्स का ध्यान रखनेवाले शख्स हैं. सेहत के लिए रोज योगासन भी करते हैं. वे ताइक्वान्डो के प्रशिक्षित खिलाड़ी हैं. शादीशुदा, एक बेटे के पिता सोनू अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा दान भी करते हैं.यह राशि वे उजागर नहीं करते लेकिन कैंसर, दृष्टिबाधित, लेप्रोसी, एड्स जैसी बीमारियों से लड़नेवाले संगठनों की मदद करते रहते हैं. वे आसराहीन बच्चों को अपने बूते पढ़ाते भी हैं. नकद दान के अलावा मुफ्त में शो भी करते हैं. वे कहते हैं कि कामयाबी तभी कामयाबी है, जब उसका फायदा सब को मिले.

प्रकाश हिन्दुस्तानी


हिन्दुस्तान 17 july 2011
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