Friday, November 21, 2014

इंदौर के ट्रैफिक रूल्स और बाकी इंडिया के

वीकेंड पोस्ट में मेरा कॉलम (03 मई 2014)

इंदौर इंडिया का अनूठा शहर है। यह वैसे तो इंडिया में ही है, लेकिन यहां के अपने ट्रैफिक रूल्स हैं। अगर आपको नहीं मालूम हों तो कृपया नोट कर लें या इस कॉलम को काटकर अपने पर्स में रख लें। 


अगर आपने अपनी गाड़ी पर 'प्रेस' नहीं लिखवाया है तो अभी लिखवा लें।  इससे कोई फायदा-वायदा नहीं होता, पर यहां पर यही चलन में है। अगर आप ऑटो रिक्शा, टेम्पो या ट्रक भी चलाते हैं, तो यह लिखवाने में कोई हर्ज नहीं। 90 प्रतिशत वाहनों पर यह लिखा होता है। 

यहां सबसे ज्यादा जल्दी में मोटरसाइकिल चालक होते हैं। इंदौर में उनके लिए यातायात का कोई भी नियम लागू नहीं है। वे चाहें तो तीन या चार लोगों को बैठाएं, अकारण हॉर्न बजाएं, प्रेशर हॉर्न फिट करा लें, दुपहिया को ट्रक बनाकर सामान लाद लें, गलत लेन में चलें, कैसे भी ओवरटेक करें,  सड़कों पर बाइक से स्टंट करें, पान-गुटका ऐसे थूकें कि दूसरों के मुंह पर जाकर गिरे, दोनों कानों में ईयरफोन लगाकर घूमें आदि-आदि की छूट घोषित की गई है। हेल्मेट की खोज अभी नहीं की गई है उनके लिए। 

इंदौर में अंध गति से केवल कारें, बसें, ट्रक, डम्पर आदि ही चलते हैं। कभी भी  मीडिया में खबर देखी है कि अंध गति से आ रही मोटरसाइकल टकरा गई।

पूर्ण स्वराज इंदौर में केवल ऑटो रिक्शा वालों को ही प्राप्त है। वे यात्री को कहीं लेकर जाएं, न जाएं, उनकी मर्जी। मनमाना भाड़ा मांगें,  उनकी मर्जी। कहीं भी सांई बाबा का मंदिर बनाने का कॉपीराइट उन्हीं के पास है। उनकी मर्जी कि कहां गाड़ी लगाएं। अगर आपके पास मोबाइल है (जैसा कि हरेक के पास है ही) तो उसका उपयोग वाहन चलाते समय ही करें, क्योंकि फोन ही मोबाइल है! अगर वाहन चलाते समय मोबाइल का उपयोग  नहीं करेंगे तो कब करेंगे।

वन वे बने ही इसलिए हैं कि कोई भी रांग साइड का  उपयोग करके शार्ट काट मार सके।  जो लोग नियमों का पालन करते हैं वे निहायत ही मूर्ख हैं। 

इंदौरियों का नियम है कि वे नौकरी ऐसे करते हैं मानो उनके लिए रुपया बिलकुल जरूरी नहीं, सड़कों पर डांस ऐसे करते हैं मानो डीआईडी के लिए नाच रहे हों और वाहन ऐसे चलाते हैं जैसे उनका इस संसार में कोई है ही नहीं। 

और अंतिम नियम -आप खुद भी कोई नियम बना सकते हैं। आजाद देश के आजाद नागरिक हैं आप!
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