Monday, July 06, 2015

उज्जैन को वैश्विक ख्याति दिलाने की कोशिश



सिंहस्थ में इस बार पर्यावरण, स्वच्छता, महिला सशक्तिकरण, धार्मिक एकता, पारस्परिक सौहार्द बढ़ाने और समसामयिक वैश्विक सरोकारों से जोड़ने की कोशिश भी की जाएगी।  


सिंहस्थ 2016 के मौके पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान चाहते है कि उज्जैन की ख्याति विश्वभर में एक विशिष्ट नगर की तरह हो। इस मौके पर उज्जैन को विशेष जिले के रूप में प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए है। उज्जैन जिले के सभी विभागों में खाली पदों को भरने का काम प्राथमिकता से किया जाएगा। दिसम्बर 2015 तक सभी निर्माण कार्य पूरे करने का लक्ष्य भी है। उज्जैन के विकास और प्रबंध से जुड़े करीब 650 करोड़ रुपए के कार्यों को भी मंजूरी दी गई है। सरकार का दावा है कि सिंहस्थ 2016 के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर के जितने काम किए जा रहे है, उतने अतीत में कभी नहीं किए गए है। 

सिंहस्थ संबंधी कार्यों में केवल निर्माण कार्य ही शामिल नहीं है। पर्यावरण, स्वच्छता, महिला सशक्तिकरण, धार्मिक एकता, पारस्परिक सौहार्द बढ़ाने और समसामयिक वैश्विक सरोकारों से जोड़ने की कोशिश भी इस सिंहस्थ में की जाएगी। 2004 के सिंहस्थ के मुकाबले इस बार लगभग दो गुने श्रद्धालु आने की संभावना है। अनुमान है कि 20 लाख लोग सिंहस्थ के दौरान स्थायी रूप से रहेंगे। सिंहस्थ और उज्जैन की महिमा को विश्व स्तर पर प्रचारित करने की कोशिशें जारी है। कोशिश है कि सिंहस्थ 2016 पूरी दुनिया में भारतीय संस्कृति का संदेश देने वाला मंच बने। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सिंहस्थ को एक वैश्विक आध्यात्मिक आयोजन कहते हैं। 



सिंहस्थ के मौके पर उज्जैन आने वाले पर्यटक मध्यप्रदेश के वनों, जीव-जंतुओं और सांस्कृतिक विरासत तथा कला की धरोहर से परिचित हो सकें, इसके लिए भी प्रयास किए जा रहे है। अनुमान है कि सिंहस्थ पर आने वाले श्रद्धालु मध्यप्रदेश के इन प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक नगरों के भी दर्शन करेंगे। खजुराहो में होने वाले नृत्य महोत्सव को नए सिरे से आकल्पित किया जा रहा है। नर्मदा जयंती पर आयोजित होने वाले दीप दान महोत्सव, मालवा में होने वाले गणेश विसर्जन, मालवा व निमाड़ के भगोरिया, महाकौशल के दुर्गा पूजन जैसे आयोजनों को उज्जैन आने वाले लोगों के लिए भी आकर्षण का केन्द्र बनाने की कोशिश जारी है। 


अनिवासी भारतीयों को सिंहस्थ दर्शन के लिए आमंत्रित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री स्वयं अगुवाई करेंगे। योग और आयुर्वेद पर अंतरराष्ट्रीय सेमिनार की योजना है। नैतिक शिक्षा के प्रचार के लिए भी आयोजन किए जा रहे है। सिंहस्थ के दौरान प्लास्टिक की थैलियों पर प्रतिबंध होने वाला है। श्रद्धालुओं से कहा जा रहा है कि वे सिंहस्थ के दौरान नदी के तट पर कपड़ों की धुलाई से बचे और नोकाओं की सवारी के वक्त ओवरलोडिंग न होने दें। पूजा और अनुष्ठान में प्रयोग होने वाली सामग्री को नदी में विसर्जित करने से बचने की सलाह भी दी जा रही है। 
--प्रकाश हिन्दुस्तानी
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