Saturday, January 11, 2014

भ्रष्टाचार प्रकोष्ठ के नेता का इंटरव्यू

वीकेंड पोस्ट के11 जनवरी 2014  के अंक में  मेरा कॉलम

 भ्रष्टाचार प्रकोष्ठ के नेता का इंटरव्यू 


( महान पार्टी के नेता के इंटरव्यू का ट्रांसस्क्रिप्ट  )

मैं : सर, मैं भ्रष्टाचार लाइव चैनल से हूँ।  आपके कुछ बाइट्स चाहिए।

नेता  : वो तो ठीक है, पर ये कौन सा चैनल है ?

मैं : भ्रष्टाचार लाइव !  अभी अभी चालू हुआ  है सर। 

नेता : ये क्या नाम है चैनल का ?

मैं : सर, यह सच्चा चैनल है।  देश और प्रदेश में हर तरह के चैनल हैं ना;   न्यूज़, फ़िल्म, संगीत, धर्म, युवा, कार्टून, खेल, फैशन, बिजनेस  चैनल जैसा  ही यह भ्रष्टाचार लाइव चैनल है!

नेता : ये चैनल नेशनल  है या रीजनल ?

मैं ; सर, मैं तो नेशनल चैनल से हूँ , हमारे रीजनल चैनल भी हैं भ्रष्टाचार लाइव एम पी -सीजी,  भ्रष्टाचार लाइव यूपी-उत्तराखंड,  भ्रष्टाचार लाइव दिल्ली एन सी आर, भ्रष्टाचार लाइव राजस्थान,  भ्रष्टाचार लाइव बिहार-झारखंड … 

नेता : बहुत अच्छे ! पार्टी ने मुझे प्रकोष्ठ  का प्रमुख बनाया है और आप भ्रष्टाचार लाइव के ब्यूरो चीफ हैं।  मिलते रहा करो। 

मैं : सर, आपके बाइट्स चाहिए दो तीन मुद्दों  पर।  

नेता  : क्यों मुझे मरवाएगा क्या? भाग यहाँ से..... 

मैं : मैं ऐसा कैसे सोच सकता हूँ सर? दादा, आप तो माई बाप हो, आप की दया के किस्से तो सब जानते हैं।  आप कितने दयालु हो यह किसी से छुपा है क्या ? मैं तो क्या मेरा मालिक भी आपके गुणगान में लगा रहता है , हमारा चैनल आप का सेवक है.....सर, मेरी नौकरी चली जाएगी बाइट नहीं मिली तो ....  

नेता : ठीक है, ठीक है … चल पूछ.… 

मैं :  थैंक यू  सर, ( माइक अड़ाने के बाद) भ्रष्टाचार प्रकोष्ठ का नेता बनकर कैसा लग रहा है ?

नेता  :  अबे हट, तेरे कू  तो येई नई पता के मैं भ्रष्टाचार प्रकोष्ठ का नहीं, भ्रष्टाचार उन्मूलन प्रकोष्ठ का प्रमुख हूँ। हट....  हट....  हट....  हट.... 

मैं :  सर, मेरा मतलब ये ही था ---- (माइक को नेता के मुंह के और पास लगाते हुए) आप भ्रष्टाचार के लिए क्या करनेवाले हैं ?

नेता : जैसा पार्टी के माननीय अध्यक्ष ने कहा है, हम किसी भी तरह के भ्रष्टाचार को सहन नहीं करने वाले। एक-एक को चुन-चुन कर जेल भिजवाकर रहेंगे। हमारी नीति साफ़ है। हम साफ़ सरकार देंगे। हमारी सरकार के रहते किसी का भी हक़ मारा नहीं जा सकता। 

मैं : सर-सर. सर, एक और बाइट प्लीज़ ! जबसे आप इस प्रकोष्ठ के प्रमुख बने हैं पूरे प्रदेश में भ्रष्टाचार रुक गया लगता है , आपके राष्ट्रीय नेता भी यह बात कह चुके हैं, अब क्या आप अपने अनुभव का लाभ दूसरे राज्यों को भी देंगे?

नेता : ये सवाल बड़ा ही इंटेलेक्चुअल है। बिल्कुल बिल्कुल सही।  पार्टी जो भी आदेश देगी सेवा के लिए,  करेंगे। 

मैं : सर, एक और सवाल,  आपको बहुत बहुत बधाई सर, कि आप एक महा आयोजन करवा रहे हैं, जिसमें बीस लाख लोगों को इकठ्ठा किया जाएगा। इसका उद्देश्य क्या है ?


नेता : हमारी नीतियों के समर्थन में बीस-तीस लाख लोग आ रहे हैं -- यही बताने कि ईमानदारी की मिसाल हमने रखी है, वह सही है। 

मैं : ( माइक हटा, केबल  समेटते हुए)  सर, एक काम करा दो ना, मेरा एक कजिन है  ई  ई,  आर पी सिंह दरबार,  कोई मलाईदार पोस्टिंग मिल जाती तो। … 

नेता  ; अबे तू ठहरा पंडित तो तेरा भाई सिंह कैसे हो गया रे ? मेरे को चूना लगाएगा?

मैं : सर भाई नहीं है पर भाई जैसा है ,  सेवा शुल्क चुका  देगा 

नेता : ये बोल.  करा दूँगा, सेवा शुल्क ! हें हें हें, अच्छा वर्ड बनाया है रे। 

मैं  : सर गरीबों की तरफ से एक याचना है।  नए शहर में बड़े चौक पर गरीबों की गुमटियां न हटाई जाए सर ,रोजी रोटी का सवाल है बेचारों का,  बेचारे गरीब कहाँ जाएंगे  …?

नेता  : तेरी गुमटी है, कौन सी ?

मैं : बड़े भैया की है जो प्रॉपर्टी का काम करते हैं....सब उनकी ही है बीस-पच्चीस होगी सर.

नेता : ठीक है, उनको बोलो रैली में, भंडारे में सबको आना चाहिए पार्टी के साथ।  गरीबों की पार्टी है, लगना  भी चाहिए।

मैं : थैंक्यू सर, थैंक्यू  सर , एक और जरा सी बात है …हमारे सम्पादक जी ने धन्यवाद कहा है और एक और प्रार्थना की है कि उनके जो भाई पुलिस में ए एस पी हैं न,  उनको ट्रांसपोर्ट विभाग  में ट्रांसफर चाहिए सर  …। 

नेता  ; मैं एयरपोर्ट जा रहा हूँ, तू भी गाड़ी में बैठ जा, रस्ते में बात कर लेंगे।  तू तो अपना ही आदमी है, मिलकर काम करेंगे तो दोनों आगे तक जायेंगे। 

मैंने माइक कैमरामैन को दिया और कहा तू चल, मैं नेताजी के साथ जा रहा हूँ। कैसेट अपने पास ही रखना, नेता जी काम करेंगे तो ही खबर चलवाएंगे, वरना ……। 

--प्रकाश हिन्दुस्तानी 
(वीकेंड पोस्ट के11 जनवरी 2014  के अंक में  मेरा कॉलम)





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