Wednesday, October 09, 2013

जो कष्ट उठा उठा कर मरे, वो कस्टमर !!!

मेरा  'एंटी कॉलम' फिर से शुरू  हो  गया 





('वीकेंड पोस्ट' के पहले अंक से मेरे बहुचर्चित रहे स्तंभ 'एंटी कॉलम' की शुरुआत फिर हो गयी . यह कॉलम दैनिक भास्कर में पहले हिन्दी में लिखा करता था बाद में इसे टाइम्स ऑफ इंडिया के इंदौर संस्करण ने लंबे समय तक प्रकाशित किया. दैनिक हिन्दुस्तान के सभी संस्करणों में हर रविवार को 'जीने की राह' शीर्षक से कॉलम लिखने और अन्य कारणों से यह लेखन नहीं हो पा रहा था, लेकिन श्री रमण रावल के संपादन में शुरू हुए 'वीकेंड पोस्ट' में संपादक के आग्रह पर इसे फिर से लिखना शुरू कर दिया है.

 अब आप इसे हर हफ्ते मेरे इस ब्लॉग पर भी देख सकेंगे.)


दीपावली के पहले घर की पुताई शुरू हुई ही थी कि श्रीमतीजी ने कहा  --दीवार पर लगा टीवी सेट उतरवा दो, वर्कर लोग गन्दा न कर दें ; पुताई के बाद फिर लगा देना। आज्ञाकारी पति के रूप में मैंने  तत्काल हाँ भरी और लगा टीवी सेट को उतारने. पर यह क्या, वो तो दीवार में नट - बोल्ट से पक्का फिट किया हुआ था. मैं समझ गया कि अपने बूते की बात नहीं है. मौका मुआयना करने के बाद मैंने जवाब दिया -- बहुत भारी  है, कुछ टूट फूट  गया तो फालतू नुक्सान हो जाएगा,  इलेक्ट्रिकवाले को ही बुलाना पड़ेगा।

--तो बुला लो।  फिर आदेश। 

मैंने स्कूटर उठाया और निकल गया इलेक्ट्रिकवाले के यहाँ।  पहली दुकान पर ही जवाब मिला -- हम ये काम नहीं करते, लोगबाग बाद में गले पड़  जाते हैं। कोई और जगह ढूंढो। तीन-चार दुकान पर पूछताछ की, पर मुआ कोई भी राजी नहीं हुआ इस छोटे से काम के लिए. इसी बीच घर से मोबाइल  पर पूछताछ हुई कि कहाँ घूम रहे हो, घर में पुताई चल रही है और उस एक कमरे का काम रुका  पड़ा है।  एक ही काम तो कहा था, वह भी   नहीं हो पा रहा है तुमसे.     मैंने सफाई दी कि इलेक्ट्रिकवाले राजी नहीं हो रहे.… झल्लाई हुई आवाज़ आई कि टीवी शोरूम से ही किसी को बुला लो , सौ-दो सौ लेगा,  पर टीवी तो उतारकर लगा देगा।  मैंने हामी भरी और घुमाया स्कूटर  टीवी शो रूम की तरफ़. पर यह क्या! यहाँ तो ताला पड़ा था. पूछताछ की तो पता चला कि आज गणेश विसर्जन हो रहा है, शोरूम बंद है. मैंने कहा --भैया, झांकी तो रात को निकलेगी, अभी  काहे  की छुट्टी? जाहिर है मैं गलत व्यक्ति से गलत बहस कर रहा था. खैर, तीन चार शोरूम के चक्कर लगाने के बाद मुझे टीवी का एक शो रूम खुला मिल ही गया। उसे देख मुझे वैसा ही खुश  हुआ जिसे मुहावरों में 'बांछें खिलना' कहते हैं। 

शो रूम में झटके से घुसते हुए मैंने कहा -- दीवार से टीवी उतारना और लगाना है, क्या कोई  टेक्निकल बन्दा है?

--ओह, टीवी शिफ्ट करना है? कहाँ से कहाँ ले जाना है? किस लोकेशन में?

--कोई लोकेशन वोकेशन नहीं, पुताई हो रही है, पुताई के बाद फिर लगा देना है। 

--मतलब दो विजिट लगाना  पड़ेगी।  एक विजिट के 500, दो के 1000  लगेंगे। 

--1000 रुपये …मेरी आँखें फटी की फटी रह गई -- मैं कोई पुराना टीवी खरीदने नहीं, उसी टीवी को, उसी सामान के साथ, उसी जगह फिट करना है, बस। दीवार पर पुताई होते ही। 

शो रूम मैंनेजर  सज्जन लगा रहा था, मेरे अचरज पर उसे कोई अचरज नहीं हुआ। सामान्य से अंदाज़ में पूछने लगा --कौन सा टीवी है ?

--सोनी कंपनी का ब्राविया।  

--पर ये तो सैमसंग का शो रूम है सर.  सोनी कंपनी के शो रूम में जाइये. 

--आप ये काम नहीं करवा सकते?

--बिलकुल नहीं।  जिस कंपनी का माल खरीदा, सर्विस भी तो उसी की लगेगी ना। 

मैं खिसिया गया. अपनी समझ पर बगैर झेंपे पूछ ही लिया कि  सोनी का शो रूम कहाँ है?

 ये एयर कंडीशंड   शो रूम वाले बड़े ही सज्जन प्रोफेशनल लोग होते हैं बेचारे।  काम करें या न करें , बोलते बहुत अच्छा है,  उन्होंने विनम्रता से पता बताया , यह भी कहा कि हमारे लायक कोई सेवा हो तो बताएं।  हमारे ग्राहक होते तो तत्काल सेवा देने की 'सोचते', वगैरह वगैरह।  मैंने भी शरीफ ग्राहक की तरह धन्यवाद दिया और  ढूँढते-ढूँढते  सोनी टीवी शो रूम पहुंचा।  जान में जान आई। अपनी मूर्खता पर तरस भी आया कि जिस कंपनी का टीवी खरीदा उसी कंपनी के पास जाना था ना। इतना सा कॉमन सेन्स तो होना ही चाहिए। सोनी के शो रूम में  जाकर मैंने  फिर अपना टेप बजाया। टीवी दीवार से उतारना और फिर फिट करना है आदि आदि। 

मैंने पहले  ही लिखा है न कि  ये एयर कंडीशंड  शो रूम वाले बड़े ही सज्जन प्रोफेशनल लोग होते हैं बेचारे।  काम करें या न करें , बोलते बहुत अच्छा है, मैनेजर ने  विनम्रता से कहा -- हो जाएगा, पर आप शो रूम आ गए हैं , आपको हमारे सर्विस सेंटर पर जाना पड़ेगा जो ए बी रोड पर है, इंडस्ट्री हाउस के पास. उन्होंने मेरा ज्ञान यह कहकर भी बढ़ाया कि सोनी बहुत ही बढ़िया और बड़ी कंपनी है और आफ्टर सेल्स सर्विस भी लाजवाब देती है. क्वालिटी मेंटेन करने के लिए और मुझ जैसे दुखियारों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहती है।  


थोड़ा  दुखी, थोड़ा क्षुब्ध और थोड़ा विचलित मैं सोनी सर्विस सेंटर की तरफ रवाना  हुआ। वहां पहुंचकर देखा कि हाट  बाजार जैसा नज़ारा था. कोई किसी को नहीं पूछ रहा था. कुछ लोग थे, जो बहुत बिजी थे. कुछ लडके-लड़कियाँ टाइप कर्मचारी भी थे, जो हंसी- ठठ्टा कर रहे थे, एसएमएस, फेसबुक, वाट्सअप में संघर्ष कर रहे थे और दिखावा कर रहे थे कि वे भी बिज़ी हैं। खैर किसी तरह मुझे एक कर्मचारी ने समय दिया।  मैंने फिर अपनी पूरी बात उससे कही। वह मुस्कराया और फिर बोला -- सर, आप यहाँ क्यों आये? आपका काम तो एक फोन से ही हो जाता।  आपको यहाँ आने की  ज़रुरत ही नहीं थी।  मेरा मनोबल टूट सा गया, बहुत स्मार्ट समझते हो अपने आप को, मैंने मन ही मन खुद को कोसा. इतना सा भी नहीं पता कि अंतर्राष्ट्रीय  स्तर की सेवा कैसी होती है !

फिर उस कर्मचारी में मुझे एक विजिटिंग कार्ड दिया और ज्ञान बढ़ाया  कि इस पर एक टोल फ्री नंबर है -- 1800 103 7799 .मैंने पूछा  कि क्या मोबाइल  से यहाँ कॉल हो सकता है? मेरी नासमझी पर वह मुस्कराया और बोला -- हाँ, हो सकता है.  उसने यह भी दोहराया कि  इस नंबर  पर फोन कर देने मात्र से ही काम हो जाता है. पैसे भी नहीं लगते फोन के. मैंने उससे पूछा कि मेरा टीवी दीवार से कब तक उतार दिया जाएगा ? उसने कहा --इस टोल फ्री नंबर पर कॉल कर दीजिए। मैंने कहा -- सर्विस सेंटर पर आ ही गया हूँ तो कॉल की क्या ज़रुरत?

उसने कहा--ज़रुरत है। आप यहाँ कॉल करके केस दर्ज कराएँगे फिर हमें यहाँ से ईमेल आएगा फिर ही हम काम कर सकते हैं। हम यहाँ अपनी मर्ज़ी से कोई सर्विस नहीं दे सकते. हर काम का हिसाब रखना पड़ता है. हर काम का शुल्क तय है। 

मेरी नैतिकता जवाब दे गयी थी।  मैंने कहा --यार, तुम टीवी दीवार से उतरवा दो, जो भी शुल्क है, ले लेना।  बिल वगैरह की हमें ज़रुरत नहीं।  

 -- ऐसा कैसे हो सकता है? उसने भी यह कहकर मुंह फेर लिया कि सोनी बहुत ही बढ़िया और बड़ी कंपनी है और आफ्टर सेल्स सर्विस भी लाजवाब देती है. क्वालिटी मेंटेन करने के लिए और मुझ जैसे ग्राहकों  की सेवा के लिए हमेशा तैयार रहती है।  

झल्लाया सा मैं सर्विस सेंटर से बाहर आया. सोचा था कि फोन ही करना है तो बाहर से फोन करके शिकायत दर्ज करा देनी चाहिए। इसी बीच श्रीमती जी का फोन बार बार आ यहाँ था, जिसने झल्लाहट और बढ़ा  दी थी। इतने से काम के लिए इतने घंटे लगा दिये. खरी खोटी सुनाने के मूड में आकर मैंने  टोल फ्री नंबर  -- 1800 103 7799 पर फोन लगाया।  सोचा था सर्विस मैनेजर से बात करके सारी दिक्कतें बताकर ही दम लूँगा।  मैंने कॉल किया उधर से काफी देर बाद जवाब आया --वेल्कम टु सोनी कस्टमर सर्विस सेंटर। थैंक यू फॉर कालिंग। योर कॉल में बी रेकार्डेड फॉर बेटर  सर्विसेस।   इफ यू आर कस्टमर, डॉयल वन, इफ यू आर डीलर, डॉयल टू. 

मैंने 1 प्रेस किया। फिर आवाज़ आई --फॉर इंग्लिश, प्रेस 1, फॉर हिन्दी प्रेस 2, फॉर बांग्ला प्रेस 3 …… मैंने  2  नंबर दबाया. सोचा --अब हड़का कर ही दम लॊङ्ग. हिंदी में मुंहजोरी की आदत भी है ही। इधर से फिर टेप बजा --डीलर का पता जानने के लिए 1 , तकनीकी सेवा के लिए 2 ,  डेमो रजिस्ट्रेशन के लिए 3 , उत्पादों की जानकारी के लिए 4 , दुबारा  विकल्प जानने  के लिए 5  और मेन  मैन्यु में जाने के लिए 6  डायल करे. मैं भी बहुत स्मार्ट हूँ, मैंने  तकनीकी सेवा के लिए  फट से 2  नंबर डायल कर दिया। फिर टेप चालू ---वायवो नोट के लिए फलाना, हैंडीकैम के लिए फलाना, होम थियेटर के लिए फलाना, प्ले स्टेशन के लिए फलाना, एल सी डी के लिए फलाना, कोई भी उत्पाद के लिए  फलाना , दुबारा विकल्प सुनाने के लिए फलाना और मेन मैन्यु में आने के लिए ढिकाना नंबर प्रेस करें। 

आठ-दस मिनिट संघर्ष के बाद मैं किसी तरह सम्बंधित विभाग में बात कर पाया। उस ऑपरेटर ने कहा कि  आप गलत जगह पर जुड़ गए हैं लेकिन चिंता की बात नहीं, मैं आपकी  सही विभाग में सही व्यक्ति से बात करा रहा हूँ. वह भी यह बताना नहीं भूला कि  सोनी बहुत ही बढ़िया और बड़ी कंपनी है और आफ्टर सेल्स सर्विस भी लाजवाब देती है. क्वालिटी मेंटेन करने के लिए और मुझ जैसे दुखियारों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहती है। 

उसने कृपा की।  मैं सही व्यक्ति से जुड़ गया था. मैंने खीजते हुए पूछा --मुझे मेरा वाल माउंटेड  टीवी दीवार से उतारना है, उतरवा दोगे ?

--बिल्कुल सर। कौन सा टीवी है?
--सोनी का ही है. 
--वो तो सही है, एल सी डी है या डी  वी दी ?
--एल सी डी है. 
--कितने साइज़ का है? कौन सा मॉडल  है?
--३२ इंच का है, मॉडल पता नहीं 
--कहाँ से खरीदा था ?
--यहीं, इंदौर से ही.
--डीलर कौन था?
--सोनी का टीवी है है तो  सोनी के ही डीलर से लिया होगा। 
--वो तो ठीक है कब खरीदा था?
मेरा पारा चढ़ गया ---कब खरीदा, पता नहीं, किससे खरीदा पता नहीं, बिल कहाँ है पता नहीं। …. --क्या मेरा काम हो सकता है?
उसने फिर पुलिसिया अंदाज़ में पूछताछ शुरू की -- आपका नाम , कहाँ रहते हैं, वगैरह वगैरह। 
खीजकर मैंने कहा की मेरा नाम ये है, पता ये, पिता का नाम, डेट ऑफ़ बिर्थ ये, पेन कार्ड-ड्राइविंग लाइसेंस आदि का नंबर पता नहीं।  …और भी कुछ पूछना  है --मेरी हाईट, मेरे बच्चों के बर्थ डे ? मज़ाक बना दिया आपने यार ?

--नाराज़ न हों, अगर वारंटी या गारंटी पीरियड में हो तो बेहतर होता।  कोई बात नहीं, हमारा सर्विस इंजीनियर आपका काम कर देगा. उसकी फीस होगी 400  रुपये प्लस सर्विस टैक्स। करीब 500 रुपये का खर्च आयेगा. 
--कितना भी आये, काम तो कर ही दो।  दे देंगे 500  रुपये और। 
उसने मुझे एक नंबर बताया जो 15728278 था।  उसने यह भी कहा कि यह मेरा 'कस्टमर सर्विस रिक्वेस्ट नंबर' है. उसी के विजिटिंग कार्ड पर मैंने उधार के पेन से नंबर नोट किया फिर शराफत से पूछा --- काम कब होगा?
--जैसे ही हमारा सर्विस  इंजीनियर फ्री होगा, लेकिन आप श्योर रहें 48 घंटे के भीतर हो जाएगा। 
--48 घंटे और वह भी 500  खर्च के बाद?
--कोशिश करेंगे की कल रात तक आपका काम हो जाए; उसने एहसान करने के अंदाज़ में कहा. 
--प्लीज़ जल्दी करा दीजिए।  मैंने कहा। मेरे सामने बेबसी थी।  इंटरनेशनल ब्रांड का माल वापरनेवाले की.  इसी  दौरान श्रीमती जी के कॉल बार-बार आते रहे. मैंने रिसीव नहीं किये. सोचा --घर जाकर ही अपनी कामयाबी की दास्तान बताऊंगा।   

…तेज़ गति से गाड़ी दौड़ाता हुआ मैं घर पहुंचा। श्रीमती जी बोलीं -- कहाँ उलझ गए थे? तुमसे तो एक  छोटा सा काम भी नहीं होता…. कब से छुट्टे के लिए परेशान हो रही हूँ।  50 रुपये मनीष को देना है। 
-कौन मनीष?
-- इलेक्ट्रिशियन।  इसी को बुलावा लिया और इसी ने  टीवी दीवार से उतारा है और फिर लगा भी देगा. आप तो पता नहीं कहाँ गायब थे। 

मैं अवाक खड़ा रह गया।  इंटर नॅशनल ब्राण्ड के सर्विस इंजीनियर का काम इस मनीष ने कर दिया।  50 रुपये में।  मेरी चिंता यह थी कि सोनी कंपनी के इंजीनियर को मैं क्या जवाब दूंगा ? उनके टोल फ्री नंबर पर दुबारा  कॉल करने की   हिम्मत अब मुझमें नहीं बची थी। 
---प्रकाश हिन्दुस्तानी 
('वीकेंड पोस्ट' के 5 अक्तूबर 2013 के अंक में प्रकाशित)

http://www.prakashhindustani.com/
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